शहर में पहली बार लाॅकडाउन उस समय टूट गया जब रविवार काे कई मोहल्ले, बस्तियों से महिलाएं के झुंड के रूप में सड़कों पर निकल आए। इनकी एक ही मांग थी कि उन्हें न तो भोजन पैकेट मिल रहे हैं और न ही खाद्य सामग्री। यह सभी चाहते हैं कि उन्हें भी यह सुविधा मिले। इस वजह महिलाएं उस जगह भी पहुंच गई, जहां प्रशासन द्वारा वितरण के लिए सामग्री एकत्रित की जा रही है।
किसी ने अफवाह फैला दी कि मानस भवन से ही सामग्री मिलेगी। कुछ लोग पुराना पोस्ट ऑफिस के पास भी एकत्रित हुए, लेकिन यहां से महिलाओं को पुलिस ने अपने पास रखे भोजन पैकेट देकर रवाना कर दिया। इन सभी को समझाया गया है कि ऐसे घरों से बाहर न आएं, क्योंकि लाॅकडाउन और धारा 144 लगी है।
इसका उल्लंघन करने के मामले में कार्रवाई भी की जाएगी। उधर बमोरी में भी भोजन की मांग उठने लगी। पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह सिसौदिया ने इसे 6 सेक्टर में बांटकर हर जरूरतमंद तक खाद्य सामग्री पहुंचाने के लिए अपनी टीम मैदान में उतार दी है।
कई लोग हैं परेशान
शहर विकासनगर, गोपालपुरा, बजरंगगढ़ आदि क्षेत्र की महिलाएं सड़कों पर आईं। 7 किमी दूर बजरंगगढ़ से एक महिला फूल बाई भी गुना पहुंची। उसका कहना था कि पंचायत में कोई भोजन आदि की व्यवस्था नहीं की, इसलिए मजबूरी में आना पड़ा।
एक महिला ज्योति बाई विकासनगर से अपने बच्चे को ही लेकर आ गई। वहीं वार्ड नंबर 6 कारीगर मोहल्ले से भी महिलाएं भोजन की मांग को लेकर सड़क पर आ गईं। कुल मिलाकर जगह-जगह क्षेत्र से महिलाएं आती रहीं, उन्हें पुलिस समझाकर वापस करती रही।
कलेक्टर ने कहा- चिंता न करें, हर जरूरतमंद को मिलेगी सुविधा, बस आप सब्र बनाए रखें
क्यों निकलीं महिलाएं घरों से
शहर के कई मोहल्ले, वार्ड एवं काॅलोनियों में प्रशासन द्वारा खाद्य सामग्री एवं भोजन के पैकेट जरूरतमंदों तक पहुंचाए जा रहे हैं। इसके लिए एक पूरा सिस्टम तैयार किया गया है। लोगों को पहले हेल्पलाइन नंबर 07542259744 पर एंट्री करानी होगी। इसके बाद ही संबंधित व्यक्ति तक सामग्री पहुंचेगी। दरअसल जिन लोगों ने इन नंबर पर एंट्री कराई, उन तक तो सामग्री पहुंच गई। लेकिन जिन लोगों ने ऐसा नहीं किया, उन्हें सुविधा नहीं मिली। बचे परिवारों को लगा कि उन्हें भोजन नहीं मिल रहा है, इस वजह से वह सड़कों पर आ गई।
जिम्मेदारों ने कहां की चूक
इस पूरे सिस्टम को लेकर शुरू से ही लापरवाही बरती जा रही है। एक तो नगर पालिका ने उन वास्तविक परिवारों की पहचान नहीं कि जिन्हें सुविधा देना है। क्योंकि पिछले माह अंत्योदय परिवार को 35 किलो के हिसाब से 3 माह का राशन मिला है। वहीं कुछ बीपीएल परिवार ऐसे हैं, उन्हें सदस्य संख्या के आधार पर राशन दिया गया। अब नगर पालिका की जिम्मेदारी है कि इन कैटेगिरी की पहले पहचान करें। अगर इन्हें कंट्रोल से गेहूं, चावल और शकर मिली है तो शेष आइटम जैसे दिए जा सकते हैं। वहीं ऐसे कई गरीब परिवार भी हैं, जो इन कैटेगिरी में नहीं आते हैं।
बमोरी में भी पूरी तैयारी
बमोरी क्षेत्र के जरूरतमंद लोगों तक खाद्य सामग्री पहुंचाने के लिए पूरी योजना तैयार की गई। यहां से भी लोगों की मांग उठ रही थी। पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह सिसौदिया, विधायक गोपीलाल जाटव एवं अन्य लोगों ने प्रशासन से चर्चा की। पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह सिसौदिया ने बताया कि बमोरी को म्याना, मारकीमहू, फतेहगढ़, झागर, बमोरी और गुना सेक्टर में बांटा है। प्रत्येक सेक्टर में पूर्व मंत्री ने अपने विश्वसनीय 5-5 लोगों को तैनात किया है। वहीं एक वाट्सएप ग्रुप बनाया है, जिसमें प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं।
कानपुर यात्रा से लौटने के 7 दिन बाद तेज बुखार, खांसी और सांस लेने में तकलीफ हुई तो महिला को किया आइशोलेट
शहर की एक काॅलोनी में रहने वाली महिला के कोरोना के प्रारंभिक लक्षण पाए जाने पर स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया। महिला के घर पहुंचकर टीम उसे लेकर आई और अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कर दिया गया। महिला को सांस लेने में तकलीफ है। इससे पहले उसे तेज बुखार था, लेकिन मेडिसिन लेने से इसमें आराम हो गया। उसके लक्षणों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना वायरस के संक्रमण की जांच के लिए सैंपल लिया है। वहीं महिला के पूरे परिवार को होम क्वारेंटाइन दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग सुबह और शाम घर पर पहुंचकर भी महिला के परिजनों की स्वास्थ्य की जांच करेगा। बताया जाता है कि महिला शहर की ही एक काॅलोनी में रहती है। वह अपने मायके कानपुर गई थी, वह यहां पर 10 से 12 दिन रुकी और इसके बाद 13 मार्च को गुना आ गई। वहां से आने पर उसकी स्थिति सामान्य थी, लेकिन 7 दिन बाद ही तबीयत बिगड़ी, अचानक तेज बुखार आया तो मेडिसिन ले ली, इससे वह ठीक हो गया। अचानक महिला की 28 मार्च को तबीयत बिगड़ी, सांस फूलने लगी, वह घबरा गई और तुरंत ही स्वास्थ्य विभाग के कॉल सेंटर पर सूचना दी। वहां से टीम पहुंची तो महिला की स्थिति बिगड़ती देख उसे अस्पताल लाया गया। यहां उसे आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया है।
फतेहगढ़ में राजस्थान से रोज पहुंच रहे 400 से ज्यादा मजदूर
राजस्थान से आ रहे प्रवासी मजदूरों का जिले में सबसे बड़ा पड़ाव बमोरी का फतेहगढ़ बनता जा रहा है। बीते 4 दिन में ही यहां डेढ़ से दो हजार मजदूर आ चुके हैं। रोजाना औसतन 400 मजदूर यहां पहुंच रहे हैं। पाडोन के पास कोटा वाले फोरलेन हाईवे से यह मजदूर जिले की सीमा में प्रवेश करते हैं। यहां आने वाले ज्यादातर मजदूर जिले के विभिन्न इलाकों में ही रहने वाले हैं। मुश्किल यह है कि इन मजदूरों की मेडिकल जांच के लिए यहां कोई खास इंतजाम नहीं है। सरपंच के बेटे सोनू भार्गव ने बताया कि राजस्थान में काम करने गए जिले के ज्यादातर इसी रास्ते से वापस लौट रहे हैं। यहां फतेहगढ़ पहला ऐसा मुकाम है, जहां उन्हें रुकने, खाने आदि का इंतजाम हो जाता है। इन प्रवासी मजदूरों के लिए भोजन तैयार करने का काम बृजमोहन जादौन की दुकान पर किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पूरे गांव से हमें आटा, चावल, सब्जी, तेल, मसाले आदि के रूप में मदद मिल रही है। अगर कोई दिक्कत आती है तो श्रम मंत्री महेंद्र सिंह सिसौदिया के वाट्स एप ग्रुप के जरिए समन्वय हो जाता है।
ज्यादातर पैदल चलकर आए
यहां पहुंच रहे ज्यादातर लोग 300 से 350 किमी पैदल चलकर आ रहे हैं। कुछ ही खुशकिस्मत हैं, जिनको कोई साधन उपलब्ध हो गया हो। लोग बताते हैं कि वे 3 दिन से लगभग लगातार ही पैदल चल रहे हैं। ठीक से सो भी नहीं पा रहे हैं। हालांकि फतेहगढ़ से उन्हें जिले के कुछ हिस्साें तक पहुंचाने के लिए वाहन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।